Baaten ❤ ki…

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  • *बातें दिल की…*
    इस सहर की बेवाकियों में
    तेरा कोई तान गुन गुनाना |

जुगनू सी झिल मिलाती
तेरा-मेरा रुठना मनाना ||

  • मै तुझसे मिलना चाहा
    मिला, ये कोई साजिश नही |

तेरा प्यार और तू भी
आशियाँ, है मेरे दिल का
कोई अधूरी ख्वाहिश नही ||

  • वक्त-बे-वक्त खुद पे
    पहरा लगा लेना |

गर् कोई रात सताये
शम्में जला लेना ||

ये पीक की किहुक है 
जो सहर डरी सी |

कुछ लम्हें थे साथ के तेरे
वो भी तड़प रही थी |||
By :Manu..

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